संवाददाता। जलालपुर, अम्बेडकरनगर
स्त्रियो ने जीवत पुत्रिका व्रत करके अपने पुत्रों के दीर्घायु की कामना किया। इस अवसर पर भगवन शिव व माता पार्वती का पूजन अर्चन करके जीत भूत वाहन की तरह पुत्रो के सुख समृद्धि व दीर्घायु की कामना की जाती है।
पौराणित कथाओं के अनुसार गंर्धव जीभूत वाहन ने शंखचूड़ नाग के प्राणों की रक्षा हेतु भगवान विष्णु के वाहन गरूण को अपना शरीर अर्पण कर दिया था। जीभूत वाहन के त्याग बलिदान व दया की भावना से सम्पन्न होकर माता पार्वती ने जीभूत वाहन को पुनः जीवित कर दिया था। इसी से स्त्रियां माता पार्वती की पूजा कर अपने पुत्रों के दीर्घायु की कामना करती है। यह जीवत पुत्रिका व्रत आश्विन कृष्णपक्ष अष्टमी को किया जाता है। गरूण ने भी जीभूत वाहन के त्याग से प्रसन्न होकर तथा गंर्धव के प्रति किये गये अपने भूल को सुधारने हेतु अमृत की वर्षा कर हड्डी मात्र शेष बचे तथा अपने द्वार मारे गये नांगो को जीवित कर दिया था तभी से यह व्रत किया जाता है।
स्त्रियो ने जीवत पुत्रिका व्रत करके अपने पुत्रों के दीर्घायु की कामना किया। इस अवसर पर भगवन शिव व माता पार्वती का पूजन अर्चन करके जीत भूत वाहन की तरह पुत्रो के सुख समृद्धि व दीर्घायु की कामना की जाती है।
पौराणित कथाओं के अनुसार गंर्धव जीभूत वाहन ने शंखचूड़ नाग के प्राणों की रक्षा हेतु भगवान विष्णु के वाहन गरूण को अपना शरीर अर्पण कर दिया था। जीभूत वाहन के त्याग बलिदान व दया की भावना से सम्पन्न होकर माता पार्वती ने जीभूत वाहन को पुनः जीवित कर दिया था। इसी से स्त्रियां माता पार्वती की पूजा कर अपने पुत्रों के दीर्घायु की कामना करती है। यह जीवत पुत्रिका व्रत आश्विन कृष्णपक्ष अष्टमी को किया जाता है। गरूण ने भी जीभूत वाहन के त्याग से प्रसन्न होकर तथा गंर्धव के प्रति किये गये अपने भूल को सुधारने हेतु अमृत की वर्षा कर हड्डी मात्र शेष बचे तथा अपने द्वार मारे गये नांगो को जीवित कर दिया था तभी से यह व्रत किया जाता है।



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