मंत्री ने कहा, बुखार में केवल पैरासीटामाल का ही करे प्रयोग
स्ट्राइड दवाओं का प्रयोग हो सकता है जान लेवा
जनपद स्तर पर मौजूद है डंेगू की जांच की सुविधा
एक दिन पूर्व तक 2992 मरीजों की जांच मंे महज 733 में हुई डेगू की पुष्टि
संवाददाता, अंबेडकरनगर।
बीते महीने भर से संक्रामक बुखार और डंेगू के बढते प्रकोप से जहां पूरे प्रदेश में दहशत फैली हुई है। वहीं राज्य सरकार के स्वस्थ्य परिवार कल्याण राज्य मंत्री शंखलाल मांझी ने एक नई पहल शुरू की है। जिसके तहत उन्होंने आम जनता के अंदर जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि कुछ मल्टीनेशन दवा कम्पनियां डेगू का दहशत फैला रही है। जिसके प्रति सावधान रहने की जरूरत है। डेंगू को लेकर आम जनता में फैले डर व इसके संबंध में लोगो को सतर्क करने के उद्देश्य से प्रदेश के स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल मांझी ने जिला मुख्यालय पर मीडिया से विस्तृत वार्ता की। मंत्री ने साफ कहा कि डेंगू को लेकर जिस प्रकार की अफवाह फैलाई जा रही उसके पीछे कुछ मल्टीनेशनल कम्पनियो द्वारा अपने उत्पाद को बेचना मुख्य कारण है। उन्होने कहा कि कम्पनियो के इस कार्य में निजी नर्सिंग होम उनका भरपूर सहयोग कर रहे हैं जहां पर जनता की जेब काटी जा रही है। उन्होने लोगों को सावधान करते हुए कहा कि डेंगू से डरने की जरूरत नहीं है बल्कि इससे बचाव का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होने कहा कि डेंगू की जांच की सुविधा सभी जिला व मंडल स्तर के चिकित्सालयो पर उपलब्ध है। केवल एनएस-एक थनात्मक होने से ही डेंगू की पुष्टि नहीं हो जाती। इसके लिए अन्य जांचे भी की जाती है। उन्होने जनता को आगाह करते हुए कहा कि यदि डेंगू की संभावना नजर आती है अथवा तेज बुखार भी रहता है तब भी पैरासिटामाल के अलावां अन्य किसी भी दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। वाईसोलोन, बेटनीसाल समेत अन्य स्ट्रवायड दवाओं का इस्तेमाल किसी भी कीमत पर नहीं करना चाहिए अन्यथा यह जान लेवा साबित हो सकता है।
मंत्री ने कहा कि 18 सितम्बर तक कुल 2992 लोगों में एनएस-एक की पुष्टि हुई है। इसके सापेक्ष आईआईजी तथा आईआईजीएम टेस्ट में केवल 733 मरीजो में ही डेंगू के वायरस होने की पुष्टि की गयी है। इनमे से केवल तीन की मौत ही डेंगू से होने की पुष्टि हुई है। उन्होने कहा कि डेंगू की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर रैपिड रिस्पान्स टीम का गठन किया गया है। जो किसी भी सूचना पर तत्काल मौके पर पहुंचकर संबंधित व्यक्ति का इलाज करेगी। मंत्री ने कहा कि डेंगू से प्रभावित मरीज को पूरी तरह से आराम करना चाहिए तथा बुखार उतारने के लिए चिकित्सक पर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाना चाहिए। यदि प्लेटलेटस 20 हजार तक पहुंच गया हो तो तुरंत मरीज को प्लेटलेटस चढ़वाना चाहिए। उन्होने कहा कि डेंगू के मच्छर साफ पानी में ही उत्पन्न होते है। इसलिए घर के आस पास कही भी पानी का जमाव नहीं होना चाहिए। डेंगू के मरीज को पैरासिटामाल के साथ-साथ प्रोटीन एवं वसा युक्त भोजन तथा मल्टीविटामिन दवाएं खिलानी चाहिए। साथ ही इससे बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए। रात में सोते समय शरीर को ढककर सोना चाहिए। उन्होने बताया कि डेंगू को लेकर निजी नर्सिंग होमो द्वारा फैलाई जा रही अफवाह को सरकार ने गंभीरता से लिया है तथा ऐसे नर्सिंग होमो पर जल्द ही कार्यवाही भी की जायेगी।
राज्य के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा केन्द्र
अम्बेडकरनगर। मंत्री शंखलाल मांझी ने कहा कि केन्द्र सरकार डेंगू के मामले में भी उत्तर-प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। उन्होने कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ जुलाई माह में आयोजित बीडीओ कांफ्रेसिंग में उत्तर-प्रदेश को केवल तीन हजार मेडीकेटेड मच्छरदानी देने की बात सामने आयी थी। जबकि इसके अलावां कुछ राज्यो को इसका कई गुना ज्यादा दिया जा रहा था। जब उन्होने इसका विरोध किया तो केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इसे बढ़ाकर 65 हजार कर दिया लेकिन विडंबना यह है कि प्रदेश को अभी तक एक भी मच्छरदानी प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि दो दिन पूर्व 60 हजार मच्छरदानी केन्द्र द्वारा भेजे जाने की जानकारी मिली है।
सीएमएस को लगायी फटकार
अम्बेडकरनगर। जिला चिकित्सालय में दवाओं के घोर अभाव की बात प्रेसवार्ता में सामने आने पर मंत्री शंखलाल मांझी बुरी तरह नाराज हो गये। उन्होने वहां मौजूद प्रभारी सीएमएस डा0 केएस पांडेय से जब जानकारी मांगी तो उन्होने सीएमएस के न होने की बात कही। यह पूछे जाने पर कि बजट के अभाव में दवाएं नहीं है तो मंत्री ने प्रभारी सीएमएस को इसे लिखित रूप में देने को कहा। गौरतलब है कि जिला चिकित्सालय में दवाओं की बेहद कमी है जिसके कारण मरीजो को काफी परेशानी हो रही है। चिकित्सको की कमी के सवाल पर मंत्री ने कहा कि यह कमी प्रदेश स्तर पर है जिसे पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
स्ट्राइड दवाओं का प्रयोग हो सकता है जान लेवा
जनपद स्तर पर मौजूद है डंेगू की जांच की सुविधा
एक दिन पूर्व तक 2992 मरीजों की जांच मंे महज 733 में हुई डेगू की पुष्टि
संवाददाता, अंबेडकरनगर।
बीते महीने भर से संक्रामक बुखार और डंेगू के बढते प्रकोप से जहां पूरे प्रदेश में दहशत फैली हुई है। वहीं राज्य सरकार के स्वस्थ्य परिवार कल्याण राज्य मंत्री शंखलाल मांझी ने एक नई पहल शुरू की है। जिसके तहत उन्होंने आम जनता के अंदर जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि कुछ मल्टीनेशन दवा कम्पनियां डेगू का दहशत फैला रही है। जिसके प्रति सावधान रहने की जरूरत है। डेंगू को लेकर आम जनता में फैले डर व इसके संबंध में लोगो को सतर्क करने के उद्देश्य से प्रदेश के स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल मांझी ने जिला मुख्यालय पर मीडिया से विस्तृत वार्ता की। मंत्री ने साफ कहा कि डेंगू को लेकर जिस प्रकार की अफवाह फैलाई जा रही उसके पीछे कुछ मल्टीनेशनल कम्पनियो द्वारा अपने उत्पाद को बेचना मुख्य कारण है। उन्होने कहा कि कम्पनियो के इस कार्य में निजी नर्सिंग होम उनका भरपूर सहयोग कर रहे हैं जहां पर जनता की जेब काटी जा रही है। उन्होने लोगों को सावधान करते हुए कहा कि डेंगू से डरने की जरूरत नहीं है बल्कि इससे बचाव का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होने कहा कि डेंगू की जांच की सुविधा सभी जिला व मंडल स्तर के चिकित्सालयो पर उपलब्ध है। केवल एनएस-एक थनात्मक होने से ही डेंगू की पुष्टि नहीं हो जाती। इसके लिए अन्य जांचे भी की जाती है। उन्होने जनता को आगाह करते हुए कहा कि यदि डेंगू की संभावना नजर आती है अथवा तेज बुखार भी रहता है तब भी पैरासिटामाल के अलावां अन्य किसी भी दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। वाईसोलोन, बेटनीसाल समेत अन्य स्ट्रवायड दवाओं का इस्तेमाल किसी भी कीमत पर नहीं करना चाहिए अन्यथा यह जान लेवा साबित हो सकता है।
मंत्री ने कहा कि 18 सितम्बर तक कुल 2992 लोगों में एनएस-एक की पुष्टि हुई है। इसके सापेक्ष आईआईजी तथा आईआईजीएम टेस्ट में केवल 733 मरीजो में ही डेंगू के वायरस होने की पुष्टि की गयी है। इनमे से केवल तीन की मौत ही डेंगू से होने की पुष्टि हुई है। उन्होने कहा कि डेंगू की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर रैपिड रिस्पान्स टीम का गठन किया गया है। जो किसी भी सूचना पर तत्काल मौके पर पहुंचकर संबंधित व्यक्ति का इलाज करेगी। मंत्री ने कहा कि डेंगू से प्रभावित मरीज को पूरी तरह से आराम करना चाहिए तथा बुखार उतारने के लिए चिकित्सक पर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाना चाहिए। यदि प्लेटलेटस 20 हजार तक पहुंच गया हो तो तुरंत मरीज को प्लेटलेटस चढ़वाना चाहिए। उन्होने कहा कि डेंगू के मच्छर साफ पानी में ही उत्पन्न होते है। इसलिए घर के आस पास कही भी पानी का जमाव नहीं होना चाहिए। डेंगू के मरीज को पैरासिटामाल के साथ-साथ प्रोटीन एवं वसा युक्त भोजन तथा मल्टीविटामिन दवाएं खिलानी चाहिए। साथ ही इससे बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए। रात में सोते समय शरीर को ढककर सोना चाहिए। उन्होने बताया कि डेंगू को लेकर निजी नर्सिंग होमो द्वारा फैलाई जा रही अफवाह को सरकार ने गंभीरता से लिया है तथा ऐसे नर्सिंग होमो पर जल्द ही कार्यवाही भी की जायेगी।
राज्य के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा केन्द्र
अम्बेडकरनगर। मंत्री शंखलाल मांझी ने कहा कि केन्द्र सरकार डेंगू के मामले में भी उत्तर-प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। उन्होने कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ जुलाई माह में आयोजित बीडीओ कांफ्रेसिंग में उत्तर-प्रदेश को केवल तीन हजार मेडीकेटेड मच्छरदानी देने की बात सामने आयी थी। जबकि इसके अलावां कुछ राज्यो को इसका कई गुना ज्यादा दिया जा रहा था। जब उन्होने इसका विरोध किया तो केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इसे बढ़ाकर 65 हजार कर दिया लेकिन विडंबना यह है कि प्रदेश को अभी तक एक भी मच्छरदानी प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि दो दिन पूर्व 60 हजार मच्छरदानी केन्द्र द्वारा भेजे जाने की जानकारी मिली है।
सीएमएस को लगायी फटकार
अम्बेडकरनगर। जिला चिकित्सालय में दवाओं के घोर अभाव की बात प्रेसवार्ता में सामने आने पर मंत्री शंखलाल मांझी बुरी तरह नाराज हो गये। उन्होने वहां मौजूद प्रभारी सीएमएस डा0 केएस पांडेय से जब जानकारी मांगी तो उन्होने सीएमएस के न होने की बात कही। यह पूछे जाने पर कि बजट के अभाव में दवाएं नहीं है तो मंत्री ने प्रभारी सीएमएस को इसे लिखित रूप में देने को कहा। गौरतलब है कि जिला चिकित्सालय में दवाओं की बेहद कमी है जिसके कारण मरीजो को काफी परेशानी हो रही है। चिकित्सको की कमी के सवाल पर मंत्री ने कहा कि यह कमी प्रदेश स्तर पर है जिसे पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।



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