मदरसा मौलाना की बैठक सम्पन्न
संवाददाता। अम्बेडकरनगर मदरसा निसारूल शहजादपुर स्थित उल्मा व अध्यापको की बैठक मदरसा मौलाना शमसूद्दीन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक को संबोधित करते हुए मदरसा मौलाना ने कहा कि इस्लामी संविधान में हुकूमत वक्त की तरफ से हस्तक्षेप की कठोर निंदा की। उन्होने कहा कि हस्तक्षेप भारतीय संविधान के विरूद्ध है क्योकि हमारा देश स्वतंत्र है और इसका संविधान हर धर्म के मानने वालो को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है जिसके अुनसार मुसलमानों को भी अपने सम्पूर्ण धार्मिक संविधान जैसे निकाह, तलाक आदि धार्मिक व इस्लामी प्रकाश में हल करने का अधिकार है। यह सब मसायल पर्सनल ला के अंतर्गत आते है। इनके अनुसार मौजूदा सरकार या न्यायालय को अपना कोई संविधान मुसलमानो पर जबरदस्त थोपना भारतीय संविधान के पूर्ण रूप से विरोध में है।
उल्मा की ओर से यह भी स्पश्ट किया गया कि निकाह व तलाक मुसलमानो के यहां केवल एक सामाजिक मसला नहीं बल्कि इस्लाम ने इन सम्पूर्ण मसालय का हुक्म निर्धारित कर दिया है। तीन तलाक का भी मसला है कि यदि किसी ने अपनी पत्नी को एक साथ तीन तलाक दी तो वह तीन ही माना जायेगा। स्त्री अपने उस पति के लिए बगैर हलाला के हलाल दुरूस्त न होगी। उन्होने कहा कि तलाक देना वर्जित है। मुसलमान को चाहिए कि यदि तलाक देने की आवश्यकता पडे़ तो राम मासिक धर्म से पवित्र होने के बाद एक बार में केवल एक तलाक दे। तीन तलाक देना तीन ही माना जायेगा। एक नहीं, जैसा कि गणित का एक साधारण विद्यार्थी इसे पूर्ण रूप से किसी को यह अधिकार नहीं है कि इस्लामी संविधान में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करें। मुसलमान इस बात को कतई बर्दाष्त नहीं कर सकता। हम मौजूदा सरकार को आगाह करते है कि अगर हुकूमत ने अपनी कार्य प्रणाली को नहीं बदला तो मुसलमान हर स्तर पर उसके विरोध में धरना प्रदर्शन करेंगे। इस राम में हर कुर्बानी देने के लिए तैयार रहेंगे। इस दौरान मौलाना अब्दुल्लाह, मौलाना मोहम्मद रजी, मौलाना मोहम्मद शमशाद आलम मिस्बाही, मौलाना मोहम्मद रिजवान, मौलाना मोहर्रम अली, मौलाना इल्तिेजा हुसैन, कारी हुस्नुद्दीन, कारी मोहम्मद जावेद, हाफिज मोहम्मद निसार अहमद, मोहम्मद मुहिबखान व अन्य अध्यापकगण उपस्थित रहे।


0 comments:
Post a Comment