नदी से सिक्का निकालना ही बना मुख्य व्यवसाय
संवाददाता। आलापुर, अम्बेडकरनगर
नदी से सिक्के निकालनें को ही बना लिया रोजगार। इनको नहीं है शिक्षा से सरोकार। अपना नाम तक नहीं लिख सके बच्चे। सरकार भले ही सर्वशिक्षा अभियान के तहत शिक्षा व्यवस्था को गाँव-गरीबों तक पहुंचाने में जुटी हो लेकिन यहां तो शिक्षा व्यवस्था रूपी किरण इन नौ निहालों तक नहीं पहुंच सकी है। यह दृश्य मंगलवार को रामनगर विकास खंड के चहोड़ाघाट स्थित सरयू नदी के तट पर देखने को मिला जहां 14 वर्ष से कम आयु के पांच बड़े-बड़े चुबंक को रस्सी में बांध नदी से सिक्के निकालने में जुटे थे। पूछने पर उन सबने अपना नाम सूरज, दिवाकर, मनोज, डब्ल्यू और शाहिल बताया लेकिन अपना नाम नहीं लिख सके। स्कूल जाने के बावत पूंछे जाने पर सभी ने बताया कि क्या फायदा स्कूल जाने से? दिनभर में 50-60 रूपये मिल जाते हैं। इसी से हम लोग अपना खर्चा भी चलाते हैं।
संवाददाता। आलापुर, अम्बेडकरनगर
नदी से सिक्के निकालनें को ही बना लिया रोजगार। इनको नहीं है शिक्षा से सरोकार। अपना नाम तक नहीं लिख सके बच्चे। सरकार भले ही सर्वशिक्षा अभियान के तहत शिक्षा व्यवस्था को गाँव-गरीबों तक पहुंचाने में जुटी हो लेकिन यहां तो शिक्षा व्यवस्था रूपी किरण इन नौ निहालों तक नहीं पहुंच सकी है। यह दृश्य मंगलवार को रामनगर विकास खंड के चहोड़ाघाट स्थित सरयू नदी के तट पर देखने को मिला जहां 14 वर्ष से कम आयु के पांच बड़े-बड़े चुबंक को रस्सी में बांध नदी से सिक्के निकालने में जुटे थे। पूछने पर उन सबने अपना नाम सूरज, दिवाकर, मनोज, डब्ल्यू और शाहिल बताया लेकिन अपना नाम नहीं लिख सके। स्कूल जाने के बावत पूंछे जाने पर सभी ने बताया कि क्या फायदा स्कूल जाने से? दिनभर में 50-60 रूपये मिल जाते हैं। इसी से हम लोग अपना खर्चा भी चलाते हैं।



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