Friday, 23 September 2016

दुष्कर्म के आरोपी चाचा को आजीवन कारावास

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक प्रथम वीके जायसवाल ने दुष्कर्म के आरोपी चाचा को आजीवन कारावास व्  ७५ हजार रुपये के अर्थ दंड की सजा सुनाई व् इसी मुकदमे में मारपीट के दो आरोपियों को पाँच पाँच वर्ष का कारावास व् २५-२५ हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई । अर्थदण्ड न अदा करने पर ६ माह का अतरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।मामला भीटी थाना क्षेत्र का है। उक्त थाना क्षेत्र के बसुपुर बनियानी निवासी १४ वर्षीय बालिका गत १४ जून २०१२ को रात में अपने घर के बाहर चारपाई पर सो रही  थी ।रात्रि के १२ बजे उसके चाचा वंशकुमार उसको घर के पीछे जबरदस्ती गन्ने के खेत में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किये।पीड़िता के परिवारजनो को जानकारी होने पर पीड़िता की माता ने थाने में तहरीर दी।तो पुलिस जाँच के लिए घर आयी।पुलिस के जाने के बाद दूसरे दिन शाम को आरोपी अपने साथ शिवराम यादव व् महरुआ थाना क्षेत्र के अतरौरा निवासी श्यामू निषाद पीड़िता के घर में घुसकर मारपीट किये और धमकी दिए की रिपोर्ट लिख्वाओगे तो जान से मर डालेंगे।पीड़ित माता की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।विवेचना के उपरांत पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में सत्र परीक्षण के लिए प्रस्तुत किया।परीक्षण के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने न्यायालय पर गवाहों को प्रस्तुत कर अपने बचाव में जिरह करते हुए तर्क प्रस्तुत किया।वही सहायक शासकीय अधिवक्ता दिलीप सिंह ने आठ गवाहों को न्यायालय पर पेश कर आरोपियों को कड़ी सजा दिए जाने के पक्ष में जिरह करते हुए तर्क प्रस्तुत किया।सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने दुष्कर्मी चाचा पर दोष सिद्ध करते हुए आजीवन कारावास व् अभियुक्तगण शिवराम व् श्यामू पर धारा ४५२ के तहत पाँच पाँच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
तीन वर्ष का कारावास
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुलदीप कुमार ने मारपीट के तीन आरोपियों को तीन तीन वर्ष का कारावास व् २५ सौ रुपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई  । अर्थदण्ड न अदा करने पर तीन माह का अतरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।मामला मालीपुर थाना क्षेत्र का है।उक्त थाना क्षेत्र के अशानन्दनपुर बरौली निवासी हौसिला प्रसाद गत २३ मार्च २००२ को खेत में गन्ना काट रहे थे उसी समय गांव के अनिल कुमार मिश्र, ओमप्रकाश व् अशोक पुरानी रंजिशवस आये और लाठी डंडा से मारने लगे जिससे हाथ टूट गया।पीड़ित के चाचा जगदम्बा प्रसाद की तहरीर पर आरोपियो के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत हुआ।विवेचना के उपरांत पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में सत्र परीक्षण के लिए प्रस्तुत किया।सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के तरफ से अपने बचाव में साक्ष्य व् तर्क प्रस्तुत किये।अभियोजन के तरफ से गवाहों को प्रस्तुत कर जिरह व् तर्क की गयी।सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने तीनो आरोपियों पर दोष सिद्ध करते हुए सजा सुनाई।

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