Tuesday, 27 September 2016

कितनी मोतबर निकली मेरी बेहुनर आंखे

हजरत शाह यूनुस का वार्षिक उर्स शबाब पर
संवाददाता। अम्बेडकरनगर
महान सूफी संत हजरत शाह यूनुस साहब 55 वार्षिक उर्स पूरे आब व ताब के साथ जारी है। इस मौके पर होने वाला नातियां मुशायरा सज्जादा नशीन हजरत शाह, इरफान साहब की सरपरस्ती में सम्पन्न हुआ। आसिफ सैफी इलाहाबादी के संचालन में देर रात चलने वाले इस नातिया मुशायरे में देश के प्रसिद्ध शायरो ने अपने कलाम व आवाज से सुनने वालो को मंत्रमुग्ध किया। मुशायरे के मंच से शायरों ने नातिया कलाम के जरिए जहां कौमी एकजहती की बात की वहीं भाई चारगी और एकता को प्रमुख मुद्दा बनाया।
मुमताज खासपुरी ने कहा कि 
कलम उठाऊ तो मिस्रा नबी नबी बोले
पढो जो नात तो दुनिया नबी नबी बोले
गुलाम नूरे मुज्जसम ने कहा कि 
रूह जहरा निकालेगा कैसे भला एक फरिश्ता यहीं सोचता रह गया
जब फरिश्तो के सरदार जिबरील पर दये फातिमा देखते रह गये।
शाने आलम ने कहा कि 
फाजिले है नेहां बेहिसाब सज्दे में
खुले हुए है हिदायत के बाब सज्दे में
कमाल वारसी कानपुरी ने कहा कि
रअफते रानाइयां ऊचाईयां
हजरते यूनुस की है गहराईयां
शकील अरफी ने कहा कि 
जिन्दगी में देख आयी उनका संगे दर आंखे
कितनी मोतबर निकली मेरी बेहुनर आंखे
अलताफ जया ने कहा कि 
आप सा कोई नहीं मेरे नबी
आप है दीने मोबी मेरी नबी
शोला ने कहा कि 
शम्ल शरमिंदा हुआ समसुदुहा के सामने
बदू फिका पड़ गया सदरूद्रोजा के सामने 
सैफ शहजादपुरी ने कहा कि 
सौला तेरी रहमत के तलबगार खड़े है
महबूब के रोजे पर गुनाहगार खड़े है

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