हड़ताल के चलते प्रभावित हो रहा कामकाज, भटक रहे तमाम छात्र
संवाददाता, अंबेडकरनगर।
लेखपाल संवर्ग अपनी मांगो के समर्थन में शासन/परिषद का ध्यान आकृष्ट करने के लिए धरनास्थल से जिला मुख्यालय होकर पटेलनगर से नई तहसील होकर धरनास्थल तक सांकेतिक मोटर साइकिल रैली निकाला जिसमें जिले के सभी 380 लेखपालों ने कार्य बहिष्कार कर रैली में भाग लिया।
धरने में लेखपाल संवर्ग की मांग जो मांग नहीं वस्तुतः आवश्यकता है पर लेखपालो के अभिभाषण का प्रमुख केन्द्र विन्दु मांग पूरी होने में सम्भावित बाधा के कारण पर केन्द्रित रहा। बैठक मंे वक्ताओं द्वारा यह विन्दु उठाया गया कि जो सरकार आम छात्रो को लैपटाप दे सकती है जो सरकार बेरोजगारो को बेरोजगारी भत्ता दे सकती है। वह अपनी ही योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश को एक पूर्ण विकसित एवं कम्प्यूटराइज राज्य बनाने के लिए मात्र चन्द कम्प्यूटर क्यो नहीं दे पा रही है। सीधा सा अर्थ है योजनाकारो द्वारा लेखपालो की समस्या/मांग, मुख्यमंत्री के समक्ष समुचित रूप में न रखकर तोड़-मरोड़ कर गलत तरीके से रखी जा रही है। जिससे सरकार जनता व लेखपाल तीनो अपनी जगह सही है लेकिन एक दूसरे के विरूद्ध खडे़ दिखाई पड़ रहे है जबकि लैपटाप हमाराी मांग नहीं अपितु आवश्यकता है जिसके बिना कार्य साकार करना असंभव है जहां आय, जाति, निवास जारी करने की समय सीमा तीन दिन कर दिया है। वहीं बिना लैपटाप के क्या जांच संभव है। शासन/परिषद जहां सारी व्यवस्था आनलाइन कर रही है वही जारी करने के संशाधन का कोई अता-पता नहीं है। वादो के मुख्यमंत्री है जिन्हे पूरा पांच वर्ष वादा करते हो गया किसी को कुछ नहीं मिला केवल झुनझुना थमा दिये है। धरने का संचालन अमजद अली द्वारा किया गया। अपने संबोधन में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष सूर्यभान सिंह, महामंत्री एएन त्रिपाठी, पीडब्ल्यूडी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अध्यक्ष प्रमोद सिंह, शिवबहादुदर सिंह, घनश्याम वर्मा, मोहम्मद सलीम, हरिश्चन्द्र वर्मा, जयदेव पांडेय, सुभाष, प्रज्वलित गौतम, रामनारायन, दीपनारायन शुक्ला आदि वक्ताओं ने सरकार की जनविरोधी, कर्मचारी विरोधी नीतियो की आलोचना की।
संवाददाता, अंबेडकरनगर।
लेखपाल संवर्ग अपनी मांगो के समर्थन में शासन/परिषद का ध्यान आकृष्ट करने के लिए धरनास्थल से जिला मुख्यालय होकर पटेलनगर से नई तहसील होकर धरनास्थल तक सांकेतिक मोटर साइकिल रैली निकाला जिसमें जिले के सभी 380 लेखपालों ने कार्य बहिष्कार कर रैली में भाग लिया।
धरने में लेखपाल संवर्ग की मांग जो मांग नहीं वस्तुतः आवश्यकता है पर लेखपालो के अभिभाषण का प्रमुख केन्द्र विन्दु मांग पूरी होने में सम्भावित बाधा के कारण पर केन्द्रित रहा। बैठक मंे वक्ताओं द्वारा यह विन्दु उठाया गया कि जो सरकार आम छात्रो को लैपटाप दे सकती है जो सरकार बेरोजगारो को बेरोजगारी भत्ता दे सकती है। वह अपनी ही योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश को एक पूर्ण विकसित एवं कम्प्यूटराइज राज्य बनाने के लिए मात्र चन्द कम्प्यूटर क्यो नहीं दे पा रही है। सीधा सा अर्थ है योजनाकारो द्वारा लेखपालो की समस्या/मांग, मुख्यमंत्री के समक्ष समुचित रूप में न रखकर तोड़-मरोड़ कर गलत तरीके से रखी जा रही है। जिससे सरकार जनता व लेखपाल तीनो अपनी जगह सही है लेकिन एक दूसरे के विरूद्ध खडे़ दिखाई पड़ रहे है जबकि लैपटाप हमाराी मांग नहीं अपितु आवश्यकता है जिसके बिना कार्य साकार करना असंभव है जहां आय, जाति, निवास जारी करने की समय सीमा तीन दिन कर दिया है। वहीं बिना लैपटाप के क्या जांच संभव है। शासन/परिषद जहां सारी व्यवस्था आनलाइन कर रही है वही जारी करने के संशाधन का कोई अता-पता नहीं है। वादो के मुख्यमंत्री है जिन्हे पूरा पांच वर्ष वादा करते हो गया किसी को कुछ नहीं मिला केवल झुनझुना थमा दिये है। धरने का संचालन अमजद अली द्वारा किया गया। अपने संबोधन में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष सूर्यभान सिंह, महामंत्री एएन त्रिपाठी, पीडब्ल्यूडी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अध्यक्ष प्रमोद सिंह, शिवबहादुदर सिंह, घनश्याम वर्मा, मोहम्मद सलीम, हरिश्चन्द्र वर्मा, जयदेव पांडेय, सुभाष, प्रज्वलित गौतम, रामनारायन, दीपनारायन शुक्ला आदि वक्ताओं ने सरकार की जनविरोधी, कर्मचारी विरोधी नीतियो की आलोचना की।



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