Sunday, 25 September 2016

एकात्म मानववाद के प्रणेता थे पंडित दीनदयाल उपाध्याय-हृदयमणि

महाबीर प्रसाद आईटीआई केन्द्र पर हुआ आयोजन
जलालपुर, अम्बेडकरनगर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानववाद के प्रेरणता थे। भारतीय संस्कृति, भारतीयता उनके जीवन का मूल मंत्र था। उनका कहना था कि संस्कृति जीवन जीने की शैली है और इसी शैली में बसुधैव कुटुम्बकम की भावना समाहित है। यदि सभी लोग उनके विचारो का अनुसरण करें और उनके जीवन दर्शन को अपना ले तो भारत को विश्व में गौरवशाली पद प्राप्त हो सकता है।
उक्त बाते पंडित महावीर प्रसाद आईटीआई केन्द्र सुरेन्द्र नगर हजपुरा के प्रबंधक हृदयमणि मिश्र ने पंडित की जयंती पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए कही। उन्होने कहा कि पंडित सामाजिक रूढ़ियो के विरूद्ध थे। आज के परिवेश में उनके विचार पहले से अधिक प्रासंगित है। लालजी तिवारी ने कहा कि पंडित का विचार था कि हमारी राष्ट्रीयता का आधार भारत माता है। वह चाहते थे कि गांवो का विकास भी शहरो की तर्ज पर हो तथा प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर मिले। हमें उनके आदर्शो पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। यदि सभी लोग उनके विचारो व दर्शन को स्वीकार कर ले तो भारतीय समाज विश्व के लिए मार्गदर्शन होगा। इस अवसर पर बासुदेव, परशुराम वर्मा, अशोक कुमार राजभर, अम्बिका प्रसाद वर्मा, राजेन्द्र प्रसाद पाल, आशाराम यादव, अभिनव चतुर्वेदी, ललित नारायण मिश्र आदि लोग उपस्थित रहे। नगर जलालपुर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में भी पंडित की जयंती पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी को संबोधित करते हुए अवध क्षेत्र के उपाध्यक्ष रामप्रकाश यादव ने कहा कि पंडित दीनदयाल का दर्शन एवं आदर्श हमारे लिए प्रेरणास्रोत है। देश भक्ति की भावना व समाज सेवा से ही कोई व्यक्ति महान बन सकता है। उनके विचारो के अनुसरण से समाज में व्याप्त तमाम बुराईयो समाप्त हो सकती है। विहिम के केशव प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि पंडित चाहते थे कि ऐसे भारत का निर्माण हो जो प्राचीन भारत से भी गौरवशाली हो। ऐसा तभी सम्भव है जब हम सभी उनके विचारो से प्रेरणा लें। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि कृष्ण गोपाल, मानिक चन्द्र सोनी, बेचन पंडित, शिवराम मिश्र, मनोज सोनी, परमानंद सैनी, देवतादीन जायसवाल आदि लोग उपस्थित रहे।

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