अभिशाप बनी सरकारी योजनाएं
संवाददाता, अंबेडकरनगर।
सरकार चाहे जितनी गरीबों के लिए योजना लागू कर दें लेकिन गरीबों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुच पाता। नतीजा यह है कि तमाम गरीब परिवार आज भी गुरूबत में जीने को मजबूर है। जो दो फिट मोटी कच्ची दीवाल उठा कर किसी तरह उसके ऊपर करकट और प्लास्टिक की बोरी रख कर अपने परिवार के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है। इसके लिए सरकारी योजना चाहे जितना हो लेकिन सारी योजना से वंचित है। ये बनराजा का पूरा नाम राम उजागिर वनराज है। इसके साथ सरकारी आवास के नाम भी कुछ नहीं न ही इस वनराजा को पूर्खा पर आज बिजली है। ऐसी दशा में यह अपने आपकों यह साबित करती है कि गांव की सरकार से लेकर ब्लाक के कर्मचारियों व अधिकारियों की उदासीनता साफ झलकती नजर आ रही है। कि ऐसे गरीबों तक शासन का लाभ आज भी नहीं पहुच रहा है। जिससे सारे कर्मचारी और अधिकार अपनी ही मस्त है।
गैस सिलेन्डर के लीक होने से लगी आग
आधा दर्जन से अधिक हुए बुखार से पीडित
गैस सिलेन्डर के लीक होने से लगी आग
आधा दर्जन से अधिक हुए बुखार से पीडित
जिला चिकित्सालय में भर्ती
संवाददाता।
अम्बेडकरनगर मौसमी बुखार के चलते आये दिन जिला चिकित्सालय में मरीज भर्ती
हो रहे है। सोमवार को भी जिला चिकित्सालय में मौसमी बुखार से छः मरीज भर्ती
हुए। मौसमी बुखार का सिलसिला लगातार जारी है।
अलीगंज थानान्तर्गत टाण्डा निवासी वजीर अहमद (14) पुत्र मोहम्मद
शब्बीर सोमवार को मौसमी बुखार के चलते हालत गंभीर होने के कारण जिला
चिकित्सालय में भर्ती हुए। वहीं अकबरपुर थानान्तर्गत उकरा निवासी रंजना
(16) पुत्री शिवशंकर रविवार की शाम तेज बुखार के कारण हालत गंभीर हो गयी।
गंभीरावस्था में परिजनों ने उसे जिला चिकित्सालय में भर्ती करवाया जहां
उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। अन्य मरीजों में अकबरपुर थानान्तर्गत अशरफपुर
बरवां निवासी नेहा (10) पुत्री राजाराम, टाण्डा थानान्तर्गत मीरानपुर
निवासी कासिम फातिमा (60) पत्नी वाजिद, उक्त थानान्तर्गत मीरानपुर निवासी
मोहम्मद अहमद (10) पुत्र शाहिद, अकबरपुर थानान्तर्गत रेलवे स्टेशन निवासी
प्रियंका (23) पुत्री अखिलेश रविवार की शाम मौसमी बुखार के चलते हालत गंभीर
हो गयी। परिजनों ने गंभीरावस्था में उन्हे जिला चिकित्सालय में भर्ती
करवाया जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। गौरतलब है कि मौसमी बुखार का
सिलसिला बढ़ता जा रहा है। विगत कुछ माह पूर्व में मौसमी बुखार के चलते कई
मरीज जिला चिकित्सालय में भर्ती हुए। इन्ही तेज बुखार के कारण अब तक कुछ
लोगो की जान भी जा चुकी है। मौसमी बुखार पर नियंत्रण कर पाना जिला
चिकित्सालय पर नामुमकिन साबित हो रहा है।



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