संवाददाता। अम्बेडकरनगर
शारदीय नवरात्रि के चैथे दिन माता कुष्मांडा की आराधना की जाती है।शास्त्रों में यह माना गया है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था तब इन्ही देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी अतः यही सृष्टि की आदि स्वरूपा यानी आदिशक्ति हैं इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है वहां निवास करने की क्षमता और शक्ति केवल माता कुष्मांडा में ही है। इनके शरीर की कांति और प्रभा मंडल भी सूर्य के समान ही दैदीप्यमान हैं। इनके तेज और प्रकाश से दशो दिशाएं प्रकाशित हो रही हैं। ब्राह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में जो अवस्थित हैं वह इन्हीं की छाया है। मां की आठ भुजाएं हैं अतः अष्टभुजा देवी के नाम से भी जानी जाती है इनके हाथों में कमंडल धनुष बाण कमल-पुष्प अमृत पूर्ण कलश चक्र तथा गदा है। जिसके द्वारा यह संसार में व्याप्त पापियों का नाश करती है मां कुष्मांडा की उपासना से समस्त रोग-शोक दूर होकर यश कीर्ति में वृद्धि होती है। नवरात्रि में देवी के इस रूप के दर्शन करने से घर परिवार में सुख शांति आती है यदि कोई सच्चे हृदय से मां का शरणागत बन जाए तो उसे सुगमता से परम पद की प्राप्ति हो सकती है अतः हम सभी को मन लगाकर माता कुष्मांडा की आराधना करनी चाहिए। वहीं ग्रामीण क्षेत्रो में दुर्गा पूजा की धूम मची हुई है। अधिकांश पंडालो में नवरात्रि के पहले दिन से ही मां के प्रतिमा को स्थापित कर कपाट खोल दिये गये है। नगर पालिका अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश वर्मा ने सोमवार को नव युवक दुर्गा पूजा समिति दुल्लापुर में पहुंचकर फीता काटकर मां के कपाट को खोला। इस दौरान उनके साथ दर्जनो गणमान्य लोग मौजूद रहे।
शारदीय नवरात्रि के चैथे दिन माता कुष्मांडा की आराधना की जाती है।शास्त्रों में यह माना गया है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था तब इन्ही देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी अतः यही सृष्टि की आदि स्वरूपा यानी आदिशक्ति हैं इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है वहां निवास करने की क्षमता और शक्ति केवल माता कुष्मांडा में ही है। इनके शरीर की कांति और प्रभा मंडल भी सूर्य के समान ही दैदीप्यमान हैं। इनके तेज और प्रकाश से दशो दिशाएं प्रकाशित हो रही हैं। ब्राह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में जो अवस्थित हैं वह इन्हीं की छाया है। मां की आठ भुजाएं हैं अतः अष्टभुजा देवी के नाम से भी जानी जाती है इनके हाथों में कमंडल धनुष बाण कमल-पुष्प अमृत पूर्ण कलश चक्र तथा गदा है। जिसके द्वारा यह संसार में व्याप्त पापियों का नाश करती है मां कुष्मांडा की उपासना से समस्त रोग-शोक दूर होकर यश कीर्ति में वृद्धि होती है। नवरात्रि में देवी के इस रूप के दर्शन करने से घर परिवार में सुख शांति आती है यदि कोई सच्चे हृदय से मां का शरणागत बन जाए तो उसे सुगमता से परम पद की प्राप्ति हो सकती है अतः हम सभी को मन लगाकर माता कुष्मांडा की आराधना करनी चाहिए। वहीं ग्रामीण क्षेत्रो में दुर्गा पूजा की धूम मची हुई है। अधिकांश पंडालो में नवरात्रि के पहले दिन से ही मां के प्रतिमा को स्थापित कर कपाट खोल दिये गये है। नगर पालिका अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश वर्मा ने सोमवार को नव युवक दुर्गा पूजा समिति दुल्लापुर में पहुंचकर फीता काटकर मां के कपाट को खोला। इस दौरान उनके साथ दर्जनो गणमान्य लोग मौजूद रहे।



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