मरीजो के साथ तीमारादारों मे बढा आक्रोश
अंबेडकरनगर। महामाया राजकीय मेडिकल कालेज सद्दरपुर में अपर जिलाधिकारी राम सूरत पाण्डेय, तथा टांडा के सत्ता धारी विधायक अजीमुलहक पहलवान एस. डी एम. टांडा ने बीते १४ तारीख की शाम को निरीक्षण क्या किया मरीजों के लिए मुसीबत बन गई।गौरतलब है कि १४ तारीख की शाम लगभग ६ बजे के आसपास टांडा के विधायक, उपजिलाधिकारी टांडा, तथा अपर जिलाधिकारी ने डेंगू के मरीजों की स्थिति का जायजा लेते हुए मेडिकल कालेज के डॉक्टरों, कर्मचारियों को इलाज में लापरवाही बरतने के कारण फटकार लगाया और डेंगू मरीजों के इलाज में लगे सभी डाक्टरों कर्मचारियों की छुट्टी रद्द कर दी गयी थी ।फटकार और छुट्टी रद्द होने से अन्दर ही अन्दर नाराज और काम न करने की नियति से उक्त कर्मचारियों ने १५ तारीख की शाम से ही मरीजों को चढने वाले ग्लूकोज की बोतल को खबर लिखे जाने तक के समय तक चढाना बन्द कर दिये थे।और न ही उन्हें इन्जंकशन दिया जा रहा है।नाम न प्रकाशित होने की दशा में एक मरीज ने पायनियर सॅवाददाता को बताया कि मेडिकल कॉलेज के सीनियर डाक्टर जो डेंगू के प्रभारी और सहप्रभारी के रूप में नियुक्त किये गये हैं उन डाक्टरों ने जूनियर डॉक्टरों तथा स्टाफ नर्सो से कहा कि इन लोगों को केवल पैरासिटामाल दवा दीजिए।ताज्जूब की बात यह है कि जो दवा मेडिकल कालेज में थी ही नहीं वह दवा रातों रात कहाँ और किस फर्म से आ गयी जबकि इस दवा की कमी सम्पूर्ण प्रदेश में चल रही है ऐसे में यहाँ उक्त दवा का शीघ्र उपलब्ध होना किसी बड़े कमी की तरफ इशारा करता है।मगर बिडंबना यह है कि यहां का प्रशासन इस प्रकार की समस्या पर कोई ध्यान देने वाला नहीं है जिससे गरीब परिवारों के मरीजों का समुचित रूप से इलाज हो सके प्रदेश सरकार भी लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों कर्मचारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।जिससे लापरवाही बढ़ने के अलावा कम होने का नाम नहीं ले रही है।जिससे मरीजों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है।जिस समाज के चिकित्सक रोगीयों के साथ द्वेष भावना से ग्रसित होकर आचरण तथा इलाज करने लगे तो समाज की अवनति के साथ ही साथ चिकित्सक को भी अनादर का सामना करना पड़ेगा।


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