पंडाटोला में एक साथ पिता, पुत्र व पत्नी की हुई थी मौत
संवाददाता। अम्बेडकरनगर जिला मुख्यालय के शहजादपुर के पंडाटोला में हुए तिहरे हत्याकांड का राज, राज ही रह गया। घटना के बाद से ही इस सनसनीखेज मामले से जुडे़ साक्ष्यो से जिस तरह से पुलिस अधिकारियो ने पैरो के तले रौंदा, उसी का परिणाम है कि इस तिहरी मौत का राज आज तक सामने नहीं आ सका। काफी जद्दोजहद के बाद एक माह बाद आयी फोरेसिंक टीम भी छः माह में अपनी रिपोर्ट नहीं दे सकी है। ऐसे में यह कहने में कतई संकोच नहीं कि इस गंभीर घटना का रहस्य अब शायद कभी भी बाहर नहीं आ सकेगा।
गौरतलब है कि 23/24 फरवरी की रात पंडाटोला मे राजेश उनकी पत्नी मन्जू तथा युवा पुत्र शुभम् की बुरी तरह जलकर मौत हो गयी थी। इस घटना की जानकारी स्थानीय लोगों को 24 फरवरी की सुबह हो सकी थी। तिहरी मौत के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी विवेक एवं पुलिस अधीक्षक अजय कुमार सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण किया था। घटना की गंभीरता को दरकिनार कर पुलिस ने इसे शार्ट सर्किट से हुई मौत बताकर मामले का पटाक्षेप कर दिया। पुलिसिया कार्यवाही पर उठे सवाल पर घटना के तीसरे दिन पुलिस ने मकान को सील किया। अगले ही दिन यह सील फिर टूटी पायी गयी। पुलिस ने मौके पर फोरेसिंक टीम अथवा डाग स्कवायड को बुलाने से परहेज किया था। लोगों का मानना है कि घटना के बाद यदि पुलिस द्वारा गंभीरता दिखायी गयी होती तो इस तिहरे हत्याकांड का राज सामने आ सकता था। मृतका मन्जू की भाभी व भाई द्वारा पुलिस उप महानिरीक्षक से की गयी बार-बार की शिकायतो के बाद घटना के माह से अधिक समय बीत जाने पर 29 मार्च को फोरेसिंक टीम ने पहुंच कर घटनास्थल से साक्ष्य इकट्ठे किये थे। अभी तक फोरेसिंक विभाग द्वारा भी इस संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं भेजी गयी है। ऐसे में इस तिहरे हत्याकांड का रहस्य आज भी बरकरार है।
संवाददाता। अम्बेडकरनगर जिला मुख्यालय के शहजादपुर के पंडाटोला में हुए तिहरे हत्याकांड का राज, राज ही रह गया। घटना के बाद से ही इस सनसनीखेज मामले से जुडे़ साक्ष्यो से जिस तरह से पुलिस अधिकारियो ने पैरो के तले रौंदा, उसी का परिणाम है कि इस तिहरी मौत का राज आज तक सामने नहीं आ सका। काफी जद्दोजहद के बाद एक माह बाद आयी फोरेसिंक टीम भी छः माह में अपनी रिपोर्ट नहीं दे सकी है। ऐसे में यह कहने में कतई संकोच नहीं कि इस गंभीर घटना का रहस्य अब शायद कभी भी बाहर नहीं आ सकेगा।
गौरतलब है कि 23/24 फरवरी की रात पंडाटोला मे राजेश उनकी पत्नी मन्जू तथा युवा पुत्र शुभम् की बुरी तरह जलकर मौत हो गयी थी। इस घटना की जानकारी स्थानीय लोगों को 24 फरवरी की सुबह हो सकी थी। तिहरी मौत के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी विवेक एवं पुलिस अधीक्षक अजय कुमार सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण किया था। घटना की गंभीरता को दरकिनार कर पुलिस ने इसे शार्ट सर्किट से हुई मौत बताकर मामले का पटाक्षेप कर दिया। पुलिसिया कार्यवाही पर उठे सवाल पर घटना के तीसरे दिन पुलिस ने मकान को सील किया। अगले ही दिन यह सील फिर टूटी पायी गयी। पुलिस ने मौके पर फोरेसिंक टीम अथवा डाग स्कवायड को बुलाने से परहेज किया था। लोगों का मानना है कि घटना के बाद यदि पुलिस द्वारा गंभीरता दिखायी गयी होती तो इस तिहरे हत्याकांड का राज सामने आ सकता था। मृतका मन्जू की भाभी व भाई द्वारा पुलिस उप महानिरीक्षक से की गयी बार-बार की शिकायतो के बाद घटना के माह से अधिक समय बीत जाने पर 29 मार्च को फोरेसिंक टीम ने पहुंच कर घटनास्थल से साक्ष्य इकट्ठे किये थे। अभी तक फोरेसिंक विभाग द्वारा भी इस संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं भेजी गयी है। ऐसे में इस तिहरे हत्याकांड का रहस्य आज भी बरकरार है।


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