महज फार्मासिस्ट के भरोसे यह अस्पताल
संवाददाता। अंबेडकरनगर। (राजीव अग्रहरि)
मूलभूत सुविधाओं से वंचित वर्षों से वेंटीलेटर पर पड़ा कटेहरी आयुर्वेदिक अस्पताल अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। कभी असाध्य रोगों के निदान के लिए खास रूप से जाना जाने वाला यह अस्पताल आज जहाँ झणियो से पटा दयनीय जर्जर भवन में बगैर डाक्टर के वर्षों से इकलौते फर्मासिस्ट के सहारे चलाया जा रहा है ।आज जब दिन के १२रू३०बजे सम्बाद दाता ने इसकी जानकारी चाही तो मौके पर मौजूद फर्मासिस्ट डॉ घनश्याम ने बताया कि नॉन बेड के इस अस्पताल में कुल तीन कर्मचारी नियुक्ति है। जिसमें फर्मासिस्ट के अतिरिक्त वार्ड ब्वाय अरुण कुमार मिश्र, अस्थाई स्टाफ नर्स पूनम यादव है। वार्ड ब्वाय के प्रति लोगों की शिकायत है कि कभीकभी ही अस्पताल आते है। महीने में नये पुराने मिलाकर चार सौ मरीजों के इलाज का दावा करने वाले फर्मासिस्ट ने बताया कि यहाँ नवम्बर २०१३ से नियुक्त डॉ राम जी गुप्ता के मौत से खाली पड़ी है। अस्पताल की दशा पर प्रसाद ने बताया कि यह अस्पताल एक तरफ बिजली, पानी, टॉयलेट जैसी मूलभूत सुविधाओं से पूर्णतः वंचित है ही घास फूस से ढके भवन के दीवारें तथा छत की प्लास्टर व ईंटें अपनेआप गिरते रहते है जिससे कभी भी यह भवन धारा शाही होकर भीषण दुर्घटना को जन्म दे सकता है ।मरम्मत तथा रखरखाव पर अपना नियंत्रण नहीं होने से यह भवन पूरी बरसात लगातार टपकता रहा जिससे हमारी दवा व अभिलेख भीग कर बर्बाद हुए। भवन स्थानांतरित के सम्बन्ध में कई वार उच्च अधिकारिओ को सूचित किया गया परंतु अभी तक निदान नहीं हो सका। किराये के भवन चल रहे इस अस्पताल के दीवाल पर आज भी वर्षों पहले स्थानांतरित हो चुके जिलाधिकारी पंकज यादव का नाम अंकित रहना इस बात का आज भी चुँगली करने लिए पर्याप्त है, कि दूसरों की जीवनदायिनी आज वर्षों से खुद जर्जरता की वेंटीलेटर पर पड़ी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। गौरतलब हो कि एक तरफ जहां पूरा प्रदेश डेंगू जैसे खतरनाक बीमारी से जूझ रहा है उसका इस विभाग में कोई दवा नहीं। मौसमी संक्रमण खाज, खजुली जैसी चर्मरोगों से सम्बन्धित बीमारी की दवा पूरे जनपद से नदारद है।




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