Friday, 21 October 2016

अब लोगों की जेब में नहीं खनकता दस का सिक्का

सिक्के के चलन को लेकर परेशान हो रहे नागरिक
नहीं ले रहे दुकानदार, प्रशासन मौन

अंबेडकरनगर। कहावत है कि सिक्का खनकता है चलता भी है। परन्तु यहां का सिक्का न तो चलता है और न ही लोगों के जेबों में खनकने का नाम ले रहा है। तहसील टांडा के अधिकांश उपभोक्ता दस रूपये के सिक्के को लेकर काफी परेशान नजर आ रहे हैं। क्यों कि जिन व्यक्तियों के पास में चार से छह सिक्के या इससे अधिक सिक्के होगें उनके लिए अब ये सिक्के किस काम आयेंगेआम लोगों के बीच में अफवाह रूपी आँधी चल रही है कि दस रूपये के सिक्के नकली हैं जिससे इन सिक्कों को लेने से दुकानदार इन्कार कर रहे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि अकेले टांडा शहर में इतने बड़े पैमाने पर सिक्कों का बाजार में आना नकली सिक्कों की सप्लाई करने वाले किसी गिरोह का तो हाथ नहीं है या फिर नकली सिक्के बनाने वाला गिरोह तो  सक्रिय नहीं है। इसके पीछे कुछ ऐसे लोगों का हाथ हो सकता है जो इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। जिससे जनपद के मात्र एक ही तहसील टांडा में इतने बड़े पैमाने पर नकली सिक्के ही दिखाई दे रहे हैं। जिसको लेकर तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। यदि संयोग वश आपके पास दस रूपये का सिक्का है तो यह मारकर चलिए कि यह नकली साबित हो सकता है और दुकानदार आपको उस रकम के सामान से वंचित कर सकता है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक टांडा तहसील के कुछ राष्ट्रीय कृत बैंक भी दस रूपये के सिक्के को लेने से मना कर रहे हैं। ऐसे मे अंजान उपभोक्ता जाय तो कहाँ जायँ।यह एक प्रश्न बन गया है जो किसी भी उपभोक्ता के लिए मुसीबत बना हुआ है।

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