सुहागिनो ने देखा चलनी से चांद, चन्द्र दर्शन कर तोड़ा व्रत
एंड्रायड फोन के माध्यम से तोड़ा व्रत
संवाददाता। अंबेडकरनगर कार्तिक कृश्ण पक्ष की चतुर्थी पर सुहागिनो ने चलनी से उगते चांद का दर्शन कर गौरी गणेश का विधि विधान के साथ पूजन किया। सोलह श्रृगांर कर सुहागिनो ने निर्जला व्रत रखा और चन्द्र दर्शन के बाद गौरी गणेश की पूजा अर्चना कर पति परमेश्वर की सलामती व दीर्घायु एवं निर्विघ्न जीवन की मन्नत मांगी। पति के प्रति सच्ची श्रद्धा के इस पर्व पर कच्ची मिट्टी के अल्पनायुक्त करवा, मिट्टी का दीपक, सिंदूर, चूड़ी, मेंहदी आदि समानो की व्यवस्था सुहागिनो ने पहले ही कर ली थी।
कार्तिक कृश्ण पक्ष चतुर्थी को सुबह से सुहागिनो ने जल त्याग कर दिया था। शाम होने से पहले सुहागिनो ने तरह-तरह के पकवान बनाकर रख लिए थे। संध्या काल से ही सबकी निगाहें आसमान में चन्द्रोदय की तरफ लगी रही। रात्रि साढे आठ बजे के आस पास जैसे ही चांद दिखा, सुहागिनो ने चलनी से चन्द्र दर्शन कर पूजन अर्चन शुरू कर दिया। सुहागिन महिलाएं नयी साड़ी पहनकर सोलह श्रृंगार करके सुसज्जित होकर पूजा के लिए तैयार थी। गोबर की गौरी, गणेश को सुपारी, सिंदूर तथा श्रृंगार के सारे सामान एवं नैवैद्य अर्पित किया तथा दीपक जलाकर उनसे अपने पति की लम्बी आयु की कामना की। पूजा अर्चना के उपरांत सुहागिनो ने चलनी से अपने पति का दर्शन भी किया। पति के हाथों जल पीकर व्रत का पारण किया। वामन पुराण में भी करवा चैथ व्रत का उल्लेख मिलता है। व्रत पर शिव, कार्तिक, चन्द्रमा, गौरी, गणेश के पूजन का विधान है। मान्यता है कि विध्ने वर गणेश और माता गौरी जब प्रसन्न होती है तो भक्तो की सारी मनोकामना पूरी कर देती है। गैर प्रांत अथवा देश के बाहर रहने वाले पतियो के लिए एंड्रायड फोन ने महती भूमिका निभायी। पत्नियो ने पूजा पाठ के उपरांत एंड्रायड फोन के माध्यम से पति का दर्शन कर अपना व्रत तोड़ा। जिनके पास एंड्रायड फोन नहीं था वे पति का फोटो देख और फोन पर वार्ता के उपरांत अपना व्रत तोड़ा। करवा चैथ का ऐसा महासंयोग अब सौ साल बाद ही मिलेगा। इस वर्श करवा चैथ बुधवार को मनाया जा रहा है। यह दिन शुभ कार्तिक मास का रोहिणी नक्षत्र का है। इस दिन चन्द्रमा रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे वहीं बुध कन्या राशि में रहेंगे। इस दिन गणेश चतुर्थी और कृश्ण की रोहिणी नक्षत्र भी है। यह दिन भगवान गणेश और श्रीकृश्ण दोनो का दिन है। यह अद्भुत संयोग करवा चैथ के व्रत को और भी शुभ व फलदायी बना रहा है।



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