Sunday, 6 November 2016

अधिकारियों की मिली भगत से 98 लाख का हुआ बंदरबाट

न तो घास कटी न ही फुलवारी लगी फिर भी कर दिया गया भुगतान 
महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कालेज का मामला 

अंबेडकरनगर, (मनीष वर्मा) महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कालेज में सौन्दर्यीकरण और सफाई के नाम पर तकरीबन एक करोड़ की धनराशि गोलमाल करने का मामला प्रकाश में आया है। न तो घास कटी और न ही फुलवारी लगी फिर भी मेडिकल कालेज और राजकीय निर्माण निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से लगभग 98 लाख रूपये का भुगतान मनमानी तरीके से कर बंदरबाट हो गया है।
महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कालेज में पूरे परिसर की साफ सफाई के लिए एक निजी कम्पनी को ठेका दिया गया है जिसके लिए हर माह लाखों रूपये का भुगतान हो रहा है बावजूद इसके परिसर की सफाई के नाम पर राजकीय निर्माण निगम की कार्यदायी संस्था करोड़ो रूपये का भुगतान कर दिया । विभागीय विश्वसनीय सूत्रो के मुताबिक मेडिकल कालेज के अधिकारियों और निर्माण निगम के अधिकारियों ने आपसी मिली भगत से परिसर की सफाई और शोन्द्रिकरण के नाम पर तकरीबन एक माह पहले 98 लाख रूपये का मनमानी तरीके से भुगतान कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक इतने बड़े धनराशि के बंदरबाट के कारण ही मेडिकल कालेज प्रशासन भी यह पूछने को तैयार नही है कि जब न तो सफाई हुई और न ही फुलवारी लगी तो भुगतान कैसे हो गया।जबकि परिसर की हकीकत यह है कि आवासीय परिसर से लेकर अस्पताल तक हर जगह झाड़ियो का अम्बार लगा है गन्दगी इस कदर फैली है कि लोगो का रहना दूभर है। इस बाबत जब निर्माण निगम के पीएम दिलीप सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे सम्पर्क नही हो सका जबकि विभागीय जेई नवीन ने बात करने से मुकर गए। इन सबसे इतर जब मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य डॉ पीके सिंह से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि पूरी बिल्डिंग अभी निर्माण निगम के अधीन है लेकिन जब उनसे पूछा गया कि सफाई क्यों नही हुई तो वे भड़क गए और कहा की जिन लोगो को ज्यादा दिक्कत हो रही है वे मेडिकल कालेज ही यहाँ से हटवा दें।

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