Sunday, 13 November 2016

जिले में ध्वस्त हुई राष्ट्रीयकृत बैंक की कार्य प्रणाली

कैस न होने व सरवर फेल होने का बना रहे बहाना
एक्सिस बैंक व एचडीएफसी ने ग्राहकों को दिया राहत

संवाददाता। अंबेडकरनगर एक हजार व पांच सौ के नोटों पर तत्काल लगी पाबंदी के बाद बैंको को सुचारू करने के लिए एक दिन का समय दिया गया। जिसके तहत बैंक कर्मचारी आम जनता को होने वाली परेशानियों की तैयारी कर सकें किन्तु प्रधानमंत्री की यह महत्वाकांक्षी योजना जिले की राष्ट्रीयकृत बैंक परवान नहीं चढा पा रहे है। बल्कि यह कहना ठीक होगा कि राष्ट्रीयकृत बैंक पूरी तरह से ध्वस्त हो गये है। न तो ये नोटो को बदलने में दिलचस्पी ले रहे और न ही इनके एटीएम अभी तक चालू हो सकें है। जिले की नाक सिर्फ दो ही बैंको के सहारे बची है जहां सुबह आठ बजे से रात के आठ बजे तक लम्बी लाइन देखी जा रही है। यही बैंक नोट भी बदल रहे है और इनका एटीएम भी चल रहा है।
देश में कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा पांच सौ और एक हजार के नोटों पर तत्काल प्रतिबंध लगा देने के बाद एक ओर जहां ईमानदार लोगों में प्रसन्नता दिखी थी और ऐसा लग रहा था कि एक या दो दिन में यह परेशानी दूर हो जायेगी। जिस तरह से देश के नाम सम्बोधन में प्रधानमंत्री ने लोगों को आश्वस्त किया था कि सभी बंैक सुबह आठ से शाम आठ बजे तक कार्य करेंगे और सभी उपभोक्ताओं को आसानी से पैसे का लेन देन हो सकेगा। किन्तु जिले के राष्ट्रीयकृत बैंक प्रधानमंत्री की मंशा पर पूरी तरह से पानी फेर चूुके है। सुबह से लम्बी लाइनों के लगने के बाद जब लोगों का नम्बर आता है तो इनके पास या तो कैस ,खत्म हो जाता है अथवा इनका सरवर जानबूझ कर जबाब दे जाता है। लोगों के कैस बदलने की बात तो दूर खाते में धन जमा करना भी काफी मुस्किल हो गया है। जिसके चलते अब लोगों में प्रधानमंत्री की इस नीति पर गुस्सा भी दिखाई पडने लगा है। अब हालात यह हो गये है कि आवश्यक बस्तुओं की खरीद्दारी के लिए भी समस्याओं तो जूझ ही रहें है अपना धन बैंको अथवा जेब मंे होने के बाद भी भिखारी जैसी स्थित से दो चार हो रहे है। राष्ट्रीयकृत बैको को छोड कर जिले में महज दो ही ऐसे बैंक है जो पूरी तनमयता के साथ लोगों के नोट बदलने व एकाउंट में जमा कराने के साथ इनके एटीएम भी चल रहे है। सबसे पहले एक्सिस बैंक ने लोगों को नई नोट तो उपलब्ध कराया ही पुराने नोटों की बदली भी शुरू कर दिया है। इसके साथ ही एचडीएफसी बैंक भी रोजाना ग्राहकों से लेनदेन कर रही है। सवाल उठता है कि यदि यह दो बैंक आठ बजे से शाम आठ बजे तक लोगों के रूपये का अदला बदली कर रहे है और इनके पास प्रर्याप्त कैस है तो राष्ट्रीयकृत बैंकों में धन क्यों नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। कही ऐसा तो नहीं है कि जानबूझ कर राष्ट्रीयकृत बैंक प्रधानमंत्री की मंशा को धूमिल करना चाह है अथवा इस तरह के बैंक कही सिर्फ बडे खाता धारको तक ही केन्द्रित तो नहीं है। बहरहाल इस समय पूरे जिले में रूपये को लेकर हर वर्ग पूरी तरह से त्राहि त्राहि कर रहा है। इसकों सुगम बनाने के लिए जिला स्तरीय अधिकारी भी बैंको पर अंकुश नहीं लगा पा रहे है।
...आखिर कैसे होगी शादी?
अंबेडकरनगर। इस समय जबकि सहालग का समय शुरू हो गया है और लोगों को रूपयों की विशेष आवश्यकता है ऐसे में वर व बधु पक्ष हलकान हो रहा है। बैकों की उदासीनता के चलते और लगाये गये प्रतिबंधो के चलते आखिर शादी व्याह के लिए होने वाली खरीद्दारी कैसे किया जाय। एक दिन में दस हजार व सप्ताह में बीस हजार रूपये निकालने के आदेश के बावजूद बैको द्वारा ऐसे लोगों को भी कोई भी कोई सहूलियत नहीं दिया जा रहा है। जिसके लिए जिला प्रशासन को आगे आने की आवश्यकता है ताकि रूपये के चलते किसी की शादी न टूट सकें।
बाजार में शुरू है मंदी का दौर
अंबेडकरनगर। बडे नोटों के बंद होने और छोटी नोटों के बाजार में कम उपलब्ध होने के चलते व्यवसाय पूरी तरह से प्रभावित हो चुका है। मुख्यबाजार शहजादपुर में जहां आम दिनों में तो चलना दूभर ही होता था वहीं सहालग के मौसम में सभी दुकानों में भीड भाड बखूबी दिखाई पडती थी लेकिन अब दो दिन से इस कदर मंदी का दौर आ गया है कि दुकानों से ग्राहक नदारत दिख रहे है। आखिर आवश्यक बस्तुओं की खरीद्दारी प्रभावित क्यों न हो जब लोगों के जेब से रूपया ही नदारत है।
कैसे होंगी बुआई?
अंबेडकरनगर। अब जब कि रवि के फसल की बुआई का मौसम आ गया हैं और किसान खाद बीज के जुगाड में जुटा है ऐसे में रूपया सबसे बडा मुद्दा उसके सामने आ रहा है। बैको और एटीएम के दगा देने के चलते खेती किसान का भी कार्य प्रभावित हो रहा है। लेकिन बैको के कर्मचारियों से इसका कोई लेना देना नहीं है उन्हंे तो बस रटा रटाया जबाब देना है कि अभी तक समुचित मात्रा में कैस उपलब्ध नहीं हो सका है।
पहले किया सराहना अब रहे है कोस
अंबेडकरनगर। देश के प्रधानमंत्री के पांच सौ व एक हजार के नोटों को बंद करने का फैसला जब आया तो देश हित में लिये गये इस फैसले को सभी ने सराहा था और इस कदम को देश भक्ति से भी जोड कर देखा था। हालांकि यह फैसला अपने आप में ऐतिहासिक है। जिससे कालेधन को तो पकडा ही जा सकेंगा आतंकवाद व नक्शलवाद को रोकने में काफी मददगार भी साबित होगा। देश भक्ति उत्साह में आम जनता तीन दिन तो अपना धैर्य बनाये रही और देशहित में परेशानियों को झेलती रही। अब जैसे जैसे समय बीतता जा रहा है लोगों की जरूरत पूरी नहीं हो रही है तो लोगों में देश भक्ति का नशा धीरे धीरे उतर रहा है और लोगों इस फैसले को कोस रहे है। हालांकि आने वाले कुछ दिनों में यह व्यवस्था सुचारू हो जायेगी लेकिन आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति न होने पर लोग इस फैसले के प्रति नाराजगी भी जाहिर करना शुरू कर दिये है। 

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