जिसे सुनने पे सारी दुनिया मस्ती में झूमती है
संवाददाता विधुतनगर, अम्बेडकरनगर। भगवान राजाबली की तपस्या से इस तरह खुश होना और उनके सिर पर अपना पैर रख देना भगवानबली से भगवान नारायण जी कहते है। जो वरदान माॅगना हो माॅग लो , लेकिन भक्त राज बली कुछ नहीं मागता। लाख कहने के बाद राजा बली ने भगवान से वरदान देने के लिए बाध्य कर देता है। वचन में बाधने के बाद भगवान भक्त के बस में हो जाते है। भगवान से वह कहता है। कि मेरे 52 दरवाजे निकलने के बाद सिर्फ आपके दर्शन हो । जिसपे भगवान उसे यह वरदान दे देते है। भगवान कथा को कथा वाचक कमलेश जी द्विवेदी जी महाराज इल्तेफातगंज नगर पंचायत के राम लीला मैदान में यह कथा सुनाई तो श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।
भगवान नारायण भक्त बली के 52 दरवाजे पर इस तरह दौड़ते है। कि जब भक्त राजाबलि महल से निकालने की चेष्टा करता है। भगवान नारायण अपने एक मूर्ती को हर दरवाजे पर लगा देता है। जिससे भक्त राजाबलि निकल न सके। उधर माता लक्ष्मी भगवान नरायण के ना आने पर व्याकुल रहती है। इसी दौरान भगवान नारद दिखते है। उनसे वह अपने पति नारायण के विषय में पूछती है। जिस पर भगवान नारद कहते है कि भगवान अपने के वहाॅ पर चैकीदारी कर रहे है। हें माता जिस पर वह कहती है। भगवान नारायण वह किस जगह नौकरी कर रहे है। जिस पर वह लक्ष्मी जी को बताते हैं कि अपने भक्त राजाबलि के दरवार पर , जिस पर माता लक्ष्मी के दरबार जा के देखती है। तो भगवान नरायण चैकीदारी कर रहे थे। माता लक्ष्मी राखी के दिन राजा बलि को राखी बाधने जाते है। राखी बाधने के पश्चात् राजा बलि माता लक्ष्मी से भंेट स्वरूप कुछ माॅगने को कहते है। जिस पर वह राजा बलि से चैकीदार को माॅगती है। राजा बलि माता लक्ष्मी को चैकीदार देने पर विवश हो जाते है। जिसपर माता लक्ष्मी राजा बलि को हर वर्ष राखी बाधॅने के लिए जाती है। यह सुन श्रद्धालु पूरी तरह भक्ति मय हो जाते है। भगवान श्री कृष्ण के राधे राधे के जयकारे से पूरा पण्डाल गूॅज उठा और भक्ति मय हो जाता है। अमृत वर्षा को सुनने के लिए पूरे पण्डाल में सरसों छिपने के के जगह भी नहीं रहती है। क्या बूढे क्या जवान सभी भागवत् कथा के पाॅचवे दिन कथा सुनने को एकत्रित है। इस मौके पर प्रमुख रूप से आयोजक यजमान अनिरूद्ध कुमार व धर्म पत्नी वेदवती ने कथा का शुभारम्भ किया। ईश्वरनगर वार्ड के सभासद प्रत्याशी अजय कसौधन व प्रमुख समाज सेवी बृजेश कुमार उर्फ पप्पू वर्मा, डा0 राधे श्याम, सुरेन्द्र उर्फ भिल्लर, बाबा बालक दास, सरजू अग्रहरी, पूर्व सभासद साधुराम, ऋतेश, सागर मद्देशिया, विख्यात व्यास पंडित अनिल दीक्षित, मयविन्द शर्मा बन्ट कथा को सुर ताल दे रहे है।




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