Wednesday, 9 November 2016

नागरिकों को छूटा पसीना, नोटों ने हाय राम बडा दुख दीना

आम नागरिकों पर भारी पड़ा सरकार का ऐतिहासिक निर्णय



पेट्रोल पम्पों, अस्पतालों सहित विभिन्न स्थानों पर चैकस रही सुरक्षा व्यवस्था
पैसा होने के बावजूद भी आवश्यक बस्तुओं के लिए तरस गये लोग 
मरीजों के परिजन और सहालग की तैयारी में जुटे लोगों को छूटे पसीने 
संवाददाता। अंबेडकरनगर देश में फैले बोगस नोटों के परिचालन पर रोक लगाने, देश के अंदर छिपा कर रखे गये काले धन को बाहर निकालने तथा कई अन्य तकनीकी कारणों के चलते भारत सरकार द्वारा पांच सौ व एक हजार रूपये के नोट को देर रात चलने से बाहर कर दिये जाने का जिले में जबरदस्त असर देखा गया। इन नोटो के बंद हो जाने से हर प्रकार का व्यवसाय प्रभावित हुआ वहीं पास में रूपया होने के बावजूद भी नागरिकों को तमाम आवश्यक बस्तुओं के लिए तरस जाना पडा। यहीं नहीं पेट्रोल पम्पों अस्पतालों रोडवेज रेलवे स्टेशन सहित विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर कडी सुरक्षा व्यवस्था तैनात रही। पेट्रोल पम्पों पर कडी सुरक्षा व्यवस्था में इन पुरानी नोटों से पेट्रोल बिक्रय किया गया। 
जिन दुकानों पर दिनभर ग्राहको की लाइन लगी रहती थी वहीं वही दुकानदार ग्राहको के इंतजार में बैठे देखे गये। कुछ दुकानों पर लोग डेविड कार्ड से भुगतान करते हुए देखे गये लेकिन ऐसे ग्राहको की संख्या काफी कम बतायी गयी। परचून की दुकानों से लेकर बड़े व थोक विक्रेताओं पर पांच सौ व एक हजार रूपये के नोट को लेकर अफरा तफरी देखी गयी। कोई दुकानदार इन नोटो को लेने के लिए तैयार नहीं। पेट्रोल पंपो पर तेल भरवाने के लिए सुबह से ही लाइन लग गयी लेकिन यहां भी लोगों को पांच सौ या एक हजार रूपये के ही तेल डलवाने को मजबूर होना पड़ा। पांच सौ अथवा एक हजार की नोट देकर कम मूल्य का तेल डालने के लिए पेट्रोल पंप मालिक तैयार ही नहीं हुए। कारण कि उनके भी सामने 100 व 50 के नोटो का जबरदस्त संकट रहा। इस प्रकार का संकट अभी एक-दो दिन और रहने की संभावना है। गुरूवार को बैंक खुलने के बाद शुक्रवार से हालात में कुछ बदलाव आने की उम्मीद है। जिला अस्पताल में पांच सौ व एक हजार रूपये के नोट आसानी से लिए गये। एलपीजी गैस के लिए भी लोगों को काफी परेशानी हुई। कारण कि सरकार ने केवल सीएनजी गैस के लिए ही पांच सौ व एक हजार रूपये के नोट लेने की छूट दी है। एलपीजी गैस वितरको ने भी 50 व 100 का नोट लेने से मना कर दिया। इसके कारण अनेक लोगों को बिना गैस लिए ही वापस लौटने को मजबूर होना पड़ा। इसी के साथ बीमार लोगों के परिजन पैसे को लेकर जहां परेशान रहे वहीं ऐसे लोगों के पैरों तले की जमीन खिसकती नजर आयी जिनके घरों में शादी आदि के मांगलिक कार्यक्रम बस एक दो दिनों मे ंआयोजित होने वाले है। 
मंगलवार की देर शाम पांच सौ व एक हजार रूपये के नोट बंद होने की सूचना संचार माध्यमो से प्रसारित होने के बाद लोगों में अफरा तफरी शुरू हो गयी। रात से ही लोग पेट्रोल पंपो पर पहंुचकर 100 व 50 की नोट हासिल करने का प्रयास करने लगे। हालात को भांप थोडी ही देर में पेट्रोल पंप मालिको ने भी पांच सौ व एक हजार रूपये का ही डीजल अथवा पेट्रोल डलवाने की बात कही। इसका कारण उनके पास फुटकर न होना बताया गया। टाण्डा मार्ग पर स्थित देवांश पेट्रोल पंप के संचालक अरविंद पांडेय ने बताया कि हर ग्राहक पेट्रोल अथवा डीजल डलवाने के बाद पांच सौ अथवा एक हजार की नोट दे रहा था। इन परिस्थितियों में थोडी ही देर में फुटकर समाप्त हो गया। उन्होने कहा कि पेट्रोल पंप पर 10 नवम्बर की रात तक पांच सौ व एक हजार रूपये की नोट लिये जायेंगे। जिला चिकित्सालय के सीएमएस डा0 ओपी सिंह ने बताया कि चिकित्सालय में आने वाले मरीजों से पांच सौ व एक हजार रूपये की नोट लेने की कोई समस्या नहीं है। सरकार द्वारा घोशित समय सीमा तक इसे स्वीकार किया जायेगा। कुछ मेडिकल स्टोरो पर इसको लेकर असमंजस की स्थिति जरूर देखी गयी लेकिन दोपहर बाद प्रशासन  के कडे रूख के बाद मेडिकल स्टोरो पर भी इसे लेने का काम शुरू हो गया। कुल मिलाकर बुधवार को दिनभर पांच सौ व एक हजार के नोट को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। मिठाई की कुछ दुकानों पर जहां दुकानदार पांच सौ का नोट ले रहे थे वहीं कुछ दुकानदार लेने से इंकार कर रहे थे। फिलहाल सरकार के इस फैसले से पहले ही दिन व्यापार को काफी झटका लगा है। सबसे अहम बात यह रही कि पैसा होने के बावजूद जो लोग आवश्यक बस्तुओं के लिए तरस गये उनके मुंह से सिर्फ यही निकला कि नोटों ने हाय राम बडा दुख दीना। 
छोटे व्यापारियों को धीरे से लगा जोर का झटका
अम्बेडकरनगर। छोटा-मोटा व्यापार कर जीवन यापन करने वाले व्यापारियो को सरकार के इस फैसले से करारा झटका लगा। शाम को खा पीकर सोने के बाद ऐसे व्यापारी जब बुधवार को सब्जी अथवा फल मंडी में पहुंचे तो पांच सौ व एक हजार की नोट को लेकर उन्हे काफी परेशानी उठानी पडी। अनेक छोटे व्यापारी बगैर सामान लिये ही वापस लौटने को मजबूर हो गये। यहीं हाल शहजादपुर स्थित फल मंडी में भी देखा गया। यहां भी आढ़तियों ने पांच सौ व एक हजार की नोट लेने से मना कर दिया। सिझौली स्थित नवीन सब्जी मंडी में बुधवार की सुबह काफी गहमा गहमी देखी गयी। पांच सौ व एक हजार की नोट को लेकर व्यापारियों की सब्जी के आढ़तियों से खूब नोक झोक हुई। अचानक हुए इस निर्णय से छोटे व्यापारी बुरी तरह प्रभावित हुए। उनका कहना था कि सरकार को समय देकर इसे लागू करना चाहिए था। कमोबेश यहीं हाल मछली मंडी व अन्य बाजारो का भी रहा। हर जगह पांच सौ व एक हजार रूपये के नोट को लेकर व्यापारी परेशान दिखे।
प्रभावित रहे सरकार कार्य नहीं चले नोट 
अम्बेडकरनगर। केन्द्र सरकार द्वारा बीती रात लिये गये ऐतिहासिक निर्णय के क्रम में जिले के सभी बैंक व एटीएम बंद रहे। बैंक कर्मी आने वाली स्थिति से निपटने की रणनीति बनाते रहे। बैंको को बंद रखने के सरकार के देर शाम लिये गये निर्णय से हर कोई बेचैन दिखा। बड़े व्यापारियों में इसकी ज्यादा चिंता देखी गयी। दिनभर की विक्री का पैसा वे कहा जमा करे, इसको लेकर वह परेशान रहे। सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाये जाने के बाद उपसंभागीय परिवहन कार्यालय में भी पांच सौ व एक हजार रूपये के नोट नहीं लिये गये। इसके कारण पंजीकरण अथवा अन्य कार्याें से गये लोगों को वापस लौटने को मजबूर होना पड़ा। एआरटीओ कार्यालय में सरकार के इस निर्णय से लगभग 10 लाख रूपये का काम काज प्रभावित हुआ है। परिवहन निगम की बसों में भी यात्री व परिचालको के बीच कहीं-कहीं पर नोक झोक की बात सामने आयी है। उप निबंधक कार्यालयों में भूमि की रजिस्ट्री का भी कार्य प्रभावित रहा। 
खूब हुआ मोल भाव
अम्बेडकरनगर। नोट बंद होने के बाद इसको लेकर अनेक स्थानों पर जबरदस्त मोल भाव होता दिखा। कुछ स्थानों पर एक हजार की नोट के बदले सात सौ से आठ सौ रूपये व पांच सौ रूपये के बदले ढाई सौ-तीन सौ रूपये दिये जाने की बात सामने आयी। मजबूरी में लोगों ने इस रास्ते को भी अपनाया। ऐसा कार्य सबसे अधिक मजदूरी तबके के लोगों के साथ हुआ। कारण कि रोज कमाने व रोज खाने की जिन्दगी जी रहे लोगों के पास बैंक में जाकर पांच सौ व हजार रूपये के नोटो को बदलने का समय नहीं है। सरकार ने एक दिन में नोटो को बदलने की सीमा भी निर्धारित कर रखी है। गुरूवार को बैंक खुलते ही बैंक के बाहर लम्बी लाइने देखने को मिलेगी। इस भीड़ से बैंक कर्मी कैसे निपट पायंेगे यह एक बडा सवाल है।

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